पिथौरागढ़ : सेना में लेफ़्टिनेंट बने पिथौरागढ़ के भूपेंद्र सिंह । किया सपना पूरा ।
देहरादून: IMA POP संपन्न हो गई है. IMA POP के बाद देश को मिले 481 नए सैन्य अफसर मिले हैं. 481 नए सैन्य अफसरों में उत्तराखंड के भी कई जवान हैं. पिथौरागढ़ के भूपेंद्र सिंह सोन भी इनमें से एक हैं.

मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के मुताबिक़, आईएमए से पास आउट होने के बाद लेफ्टिनेंट भूपेंद्र सिंह सोन ने कहा आज वे गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं. उन्होंने कहा आज वे सेना में कमिशन हो रहे हैं. इस खास दिन के लिए उन्होंने लंबा इंतजार किया है. लेफ्टिनेंट भूपेंद्र सिंह सोन ने कहा आईएमए तक पहुंचने के लिए उन्होंने कड़ा परिश्रम किया है. उन्होंने कहा आज उनकी मेहनत का फल उन्हें मिल गया है.
पहाड़ी प्रदेश उत्तराखंड सेना में योगदान के लिए जाना जाता है. यहां के अधिकतक युवा सेना का हिस्सा बनते हैं. पहाड़ के हर गांव के हर परिवार में से एक आदमी फौज में जाता है. इसलिए उत्तराखंड को फौज की खान के रूप में जाना जाता है. यहां के युवा फौज को सपने के रूप में देखते हैं. ऐसे युवाओं को संदेश देते हुए लेफ्टिनेंट भूपेंद्र सिंह सोन ने कहा पीपिंग देखर युवाओं के मोटिवेट होना चाहिए. उन्होंने कहा जीवन में कभी भी हार्डवर्क से पीछे नहीं हटना चाहिए. उन्होंने कहा सपफलता का डगर कठिन होती है. सभी को मंजिल धीरे धीरे ही मिलती है. ऐसे में युवाओं को अपने कर्तव्य पथ में आगे बढ़ते रहना चाहिए.
लेफ्टिनेंट भूपेंद्र सिंह सोन के पिता मनोज सिंह सोन ने कहा आज उनका सपना साकार हो गया है. उन्होंने कहा आज उनके बेटे के कंधों पर सितारे चमक रहे हैं. जिससे उनकी चेहरे की चमक बढ़ गई है. उन्होंने बेटे की जर्नी के बारे में विस्तार से बात की. उन्होंने कहा भूपेंद्र सिंह सोन ने शुरू से ही पढ़ने में तेज थे. उन्होंने शुरूआत पढ़ाई पिथौरागढ़ की. इसके बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली गये. उनकी उच्च शिक्षा दिल्ली डीयू से हुई है. भूपेंद्र सिंह सोन ने बीएससी मैथ्स से की है.
लेफ्टिनेंट भूपेंद्र सिंह सोन की माता मंजू की आंखें भी इस मौके पर भरी नजर आई. उन्होंने कहा लेफ्टिनेंट भूपेंद्र बचपन से ही हर काम को गंभीरता से लेता है. उसकी सफलता का कारण भी यही है. वहीं, लेफ्टिनेंट भूपेंद्र सिंह सोन से दादा पूरण सिंह भी फौज से रिटायर हुये हैं. उन्होंने उनके नाती ने उनकी लैगेसी को आगे बढ़ाया है. उन्होंने कहा नाती को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है.

