रुद्रपुर : महिला ने लगाए युवक पर दुष्कर्म के साथ कई गंभीर आरोप , मुकदमा दर्ज ।
रुद्रपुर: दिनेशपुर थाना क्षेत्र में एक महिला ने युवक पर दुष्कर्म, आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने, जान से मारने की धमकी देने और जबरन धर्म परिवर्तन कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है. सीओ विभव सैनी ने बताया कि महिला की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है और मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है.
पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, 27 अक्टूबर 2026 को महिला ने थाना दिनेशपुर में शिकायत दर्ज कराई. पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने फोन पर उससे दोस्ती की और फिर अपने जन्मदिन का बहाना बनाकर उसे एक होटल में ले गया. वहां कथित तौर पर कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए और उसकी आपत्तिजनक वीडियो बना ली.
मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के मुताबिक़, महिला के मुताबिक, वीडियो बनाने के बाद आरोपी उसे ब्लैकमेल करने लगा और बार-बार शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालता था. विरोध करने पर उसे बदनाम करने, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने और जान से मारने की धमकी दी जाती थी.
आरोप है कि आरोपी उसे जब भी बुलाता था, वहां आने के लिए मजबूर करता था.पीड़िता ने शिकायत में बताया कि एक दिन आरोपी के बुलाने पर वह नहीं गई तो उसने कथित तौर पर उसकी वीडियो उसके पति को दिखा दी. इसके बाद परिवार में विवाद बढ़ गया और अंततः उसका तलाक हो गया. महिला का आरोप है कि आरोपी उसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर डालने की धमकी देकर लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करता रहा.
तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है. पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है. मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी.
-विभव सैनी, सीओ-
शिकायत के अनुसार, आरोपी जुलाई माह में महिला को अजमेर शरीफ दरगाह ले गया, जहां कथित तौर पर उसका धर्म परिवर्तन कराया गया. महिला ने आरोप लगाया कि इस दौरान उसे धोखे से प्रतिबंधित मांस भी खिलाया गया. पीड़िता के मुताबिक, इसके बाद आरोपी ने उसके साथ दुर्व्यवहार और शारीरिक शोषण जारी रखा. लगातार प्रताड़ना से परेशान होकर आखिरकार महिला ने पुलिस से शिकायत की. मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना दिनेशपुर में एफआईआर संख्या 179/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 और 351(3) तथा उत्तराखंड धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 3/5 में मुकदमा दर्ज किया गया है.

